बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) जीसी जैन बिजयनगर शहर को चार चांद लग जाए तो आदर्श शहर और अति सुन्दर व स्वच्छ बन जाए। वाह भाई वाह! कैसा सुन्दर सपना आया है आज। मैंने सपने में देखा 100 साल का मेरा बिजयनगर कितना विशाल हो चुका है। बड़ी-बड़ी ऊंची-ऊंची गगन भेदी अट्टालिकाएं, चौड़े-चौड़े और सीधी-सीधी रास्तों वाले गली-मोहल्ले एवं बाजार, बढिय़ा सीमेंटेड सड़कें व नालियों से युक्त जहां व्यापार की भरमार जिसमें सोना-चांदी, कपड़े, खाद्य पदार्थ, हार्डवेयर एवं मशीनरी आदि।
ग्राहकों की बाजारों में भीड़, वातानुकूलित प्रतिक्षालय वाला रेलवे स्टेशन, प्रथम श्रेणी का बस स्टेण्ड यात्रियों की सुविधा युक्त, जहां शिक्षा को पाने के लिए सरकारी, प्राईवेट अच्छे स्कूल कॉलेज की उपलब्धता-पढ़ाई का स्तर उच्च श्रेणी का, चिकित्सा के लिए हॉस्पिटल जहां अच्छे-अच्छे डॉक्टरों की सेवाएं, न्याय पाने के लिए न्यायालय, प्रशासनिक सेवाओं के लिए नगर पालिका, तहसील व उपपंजीयक कार्यालय, थाना व जल बिजली विभाग के कार्यालय, प्रेस -पत्रकार आदि सभी व्यवस्थाएं उत्तमोत्तम है।
जहां के नागरिक अत्यंत खुशहाल है, निरोग है, शांत प्रिय है। धर्म में रुचि रखने वाले है सभी जाति धर्मों के जहां धर्मस्थान, मंदिर, मस्जिद, देवस्थान और धर्म गुरु ज्ञान देने वाले हैं। कृषि उपज व्यापार के लिए कृषि उपज मंडी संचालित है। चंहुओर के कृषक जहां अपना माल बेचने आते हैं। उद्योग धंधे काफी मात्रा में है। सभी प्रकार की शहर में खुशहाली और शांतिमय वातावरण देखने को पाकर चहुंओर के लोग यहां आकर के बसते हैं। एक छोटी सी जगह बड़ा शहर बन गया और बनता ही जा रहा है। सपनों में यह सब देखकर अत्यंत खुशी हुई। काश यह सपना सच हो।
शहर में अतिक्रमण से मुक्ति, बारिश के दिनों में पानी निकासी के लिए नाले, स्वच्छ व सुंदर शहर बिजनगर का सपना है और यही परिकल्पना भी। नगर का हर नागरिक अपने कर्तव्य का निर्वहन करे तो बिजयनगर को चार चांद लगते देर नहीं लगेगी।