सोच समझ कर करें 'चुनाव’


स्थानीय लोग पैराशूट प्रत्याशियों को तवज्जो नहीं देने का मानस बनाए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को दावेदारों को पार्टी सिंबल देने में भारी माथापच्ची करनी पड़ रही है। आलम यह है कि 'एक को मनाएं तो दर्जनों रूठ जाएंगे’ की स्थिति बन रही है। वहीं दावेदारों ने जिस तरह अपने परिजनों के नाम पर भी एनओसी बनवाए हैं, उससे भी राजनीतिक दलों की पेशानी पर बल पडऩे लगा है।

बिजयनगर व गुलाबपुरा में नगर पालिका बोर्ड चुनाव की सियासी बिसात बिछने लगी है। कोरोना के कारण लगभग पांच महीने बाद हो रहे निकाय चुनाव को लेकर इंतजार भी था। अब उत्साह है। सियासी जोड़-तोड़ है। दावेदारों का अपना गणित है और राजनीतिक दलों का अपना। स्थानीय लोग पैराशूट प्रत्याशियों को तवज्जो नहीं देने का मानस बनाए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को दावेदारों को पार्टी सिंबल देने में भारी माथापच्ची करनी पड़ रही है। आलम यह है कि 'एक को मनाएं तो दर्जनों रूठ जाएंगे’ की स्थिति बन रही है। वहीं दावेदारों ने जिस तरह अपने परिजनों के नाम पर भी एनओसी बनवाए हैं, उससे भी राजनीतिक दलों की पेशानी पर बल पडऩे लगा है। पाटी सिंबल के लिए दम भरने वालों में से कब कौन बागी हो जाए, इसकी आशंका भी जताई जा रही है। फिर निर्दलीय भी दो-दो हाथ करने को आतुर है।

वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी मैदान में आकर चुनावी समीकरण को नए सिरे से सोचने-समझने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में न तो निर्दलीयों की उपस्थिति और न ही बागियों के दम-खम को नकारा जा सकता। सच तो यह है कि पहले भी निर्दलियों ने समीकरण बिगाड़ा है वहीं ऐन मौके पर दलबदलुओं ने भी अपने तेवर दिखाए हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को हर पहलुओं पर गौर करते हुए सिम्बल देना चाहिए। खासकर तब, जब दोनों ही पालिका बोर्ड में पिछले चुनाव की तुलना में इस बार 25 के बजाय 35 वार्डों में चुनाव होने हैं। ऐसे में पैराशूट प्रत्याशियों को सिम्बल देना आत्मघाती साबित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वैसे भी परिसीमन के बाद वार्डों के मतदाता किसी भी बाहरी प्रत्याशी को अपना उम्मीदवार स्वीकार करने को राजी नहीं दिख रहे। परिसीमन के बाद वार्ड बदलने से कई दावेदारों ने जिस तरह अपनी सियासी जमीन की तलाश शुरू की उससे यह साफ जाहिर है कि मुकाबला न केवल रोचक होगा बल्कि कांटे की टक्कर भी होगी। आखिरी संदेश यह कि सबसे अहम जिम्मेदारी अब मतदाताओं की है। अपना मत-दान अवश्य करें, लेकिन प्रत्याशी को हर कसौटी पर जांच-परख कर ही। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अपनी सेहत का खयाल भी रखें। मकर संक्रांति की अनंत शुभकामनाओं के साथ। जयहिन्द।
दिनेश ढाबरिया, सम्पादक

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